अनकही बातें

बातें जो दिल से निकलीं ...पर ज़ुबां तक न पहुंची ...बस बीच में ही कहीं कलम से होती हुयी पन्नों पर अटक गयीं... यही कुछ है इन अनकही बातों में...

Tuesday, October 11

साथ....



रेत पर लिखा था तेरा नाम मेरे नाम के साथ,
खुशनसीब थे कि हो गया ये उम्र भर का साथ।

खुशबू की तरह तुमको रूह में उतारा है,
जाओ कहीं भी लेकिन रहता है साया साथ।

दुआओं में था असर हम एक दूजे को मिल गये,
लोगों की भी नज़र में है तेरा और मेरा साथ।

खुशी की थी इम्तिहां कि आंख में पानी सा भर गया,
गम और खुशी तो बस ऎसे ही चलते हैं साथ साथ।

2 Comments:

  • At Tuesday, October 11, 2005 4:19:00 PM, Blogger अनूप शुक्ला said…

    फोटो भी खूबसूरत है-कविता के साथ-
    खुशबू की तरह तुमको रूह में उतारा है,
    जाओ कहीं भी लेकिन रहता है साया साथ।

    दुआओं में था असर हम एक दूजे को मिल गये,
    लोगों की भी नज़र में है तेरा और मेरा साथ।

    ये लाइनें क्या प्रत्यक्षा के दबाव में लिखीं गयीं?
    खुशी की थी इम्तिहां कि आंख में पानी सा भर गया,
    गम और खुशी तो बस ऎसे ही चलते हैं साथ साथ।::)

     
  • At Tuesday, October 18, 2005 6:23:00 AM, Blogger Pratyaksha said…

    सारिका की सुन्दर कवितायें गुलाब पर ओस की बूंदों की तरह लगती हैं.
    अनूप जी, ये तो हमारा (मेरा और सारिका का ) मिज़ाज कुछ एक सा है , सो एक से रंग आपको दिखते हैं :-))

    प्रत्यक्षा

     

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