Saturday, September 24, 2016

कार की ज़रूरत

ज़िन्दगी आजकल ग्यारह नंबर की गाड़ी पर आ गयी है। कार बाढ़ की भेंट चढ़ चुकी है... इससे पहले कभी सोंचा नहीं था कि कार इतनी ज़रूरत की चीज़ है.... सालों पहले हमारे छोटे से शहर में तो कार विलासिता की चीज़ हुआ करती थी..... पता ही नहीं चला कब ये ज़रूरत की चीज़ बन गयी....स्कूटर चलाना आता तो है पर हम ट्रैफिक में कभी भी इसे नहीं चला पाते....कार ही अपनी साथी थी....और अब घर से निकलने से पहले दस बार सोंचते हैं....ज्यादातर चीजें Amazon और Big Basket से आ रही हैं....एक posotive thought बस यही है कि शायद चल-चल कर थोड़ा वजन ही कम हो जाय :-)

Saturday, December 19, 2015

वापस चेन्नई

आज वापस चेन्नई आ गये।

शहर चल तो रहा है पर थोड़ा सुस्त सा.....
चेहरे भी कुछ उदास से हैं और कुछ नाराज़ से.....                    
शिकायत कुछ 'उस' से है कुछ अपने आप से....
सिमट गया था जब शहर का दायरा तो दिल और बड़े हो गये थे.... एक पन्ना और पलट गया बस वक्त की किताब का।

Tuesday, December 01, 2015

दिसंबर

वक़्त की अंगीठी में सुलग कर, चुक गया ये साल भी 

लो फिर से आया है दिसंबर ज्यों अंत है शुरूवात भी. 

Saturday, November 21, 2015

बारिश के बाद..........

आज करीब दो हफ़्तों के बाद खिली निखरी धूप निकली है। इतनी तेज कि आँखों को चुभ रही है। नीले आसमान में सफेद बादलों के टुकड़े टंगे हुए हैं जैसे कि किसी ने बारिश के बाद धूप देखकर ढेर सारे कपडे सुखाने को डाल दिये हों।
लोग अपने घरों को वापस लौट रहे हैं। river view enclave में जहां दो दिन पहले नाव चल रही थी, आज लोग पैदल चल कर माहौल का जायज़ा ले रहे हैं। दीवारों पर पानी उतरने के बाद की चित्रकारी देख रहे हैं। घरों के सामने पुराने बिस्तर, तकिये, कपडे और भी न जाने क्या क्या कूड़े के ढेर में पड़ा है, पानी ने किसी को नहीं को बक्शा है। अडयार नदी में पानी कुछ नीचे उतर गया है पर नदी अभी भी पूरे वेग से बह रही है। हम सब को अहसास कराती हुयी कि प्रक्रति के आगे मनुष्य की ताकत कुछ भी नहीँ है।

Wednesday, November 04, 2015

नवंबर


धूप के कुछ टुकड़े टँगे हैं बादलों की डोर पे
नवंबर ने दे दी है दस्तक बहक के हर ओर से!