Sunday, June 01, 2014

जून

तम से भरे मन के गगन में तुम दीप के जैसे जले. 

जून की इस तपन में तुम छाँव के जैसे मिले! 

Thursday, May 15, 2014

मई

चिलचिलाती धूप ले कर आ गई जबसे मई,
संग तेरे होने लगी है ज़िंदगी फिर से नई


Wednesday, December 11, 2013

नज़्म

कुछ आड़ी तिरछी  लकीरें
जो मेरी उँगलियों की राह होते हुए
पन्नों पर खिंच जाया करती थीं
और शक्ल देतीं थी किसी नज़्म को
वो होती तो मेरा एक हिस्सा ही थीं
जो मेरे होने को
एक और मानी सा देतीं थीं ......
....पर बहुत दिन हुए
ये शब्द अब उमड़ते ही नहीं ....
न लेते हैं कोई शक्ल नज़मों की
बस उदास, हैरान ठहरे रहते हैं
मन के अंदर ही
जैसे मुख़्तसर हों किसी तूफ़ान के…

कभी कभी कुछ तूफ़ान जरूरी होते हैं .

Tuesday, May 17, 2011

तेरे आने की आहट से

 
तेरे आने की आहट से
फिजायें रंग लायीं हैं|
खिले हैं फूल गुलशन में,
बहारें मुस्कुराई हैं|

शरारत की है मौसम ने
फलक से घूँघट हटाया है
चमक उट्ठी है हर सू यूँ
सुबह ओस में नहाई है|

रूह ने किये सिंगार सोलह
बदन कोरा था पर अब तक
तेरी बाहों के घेरे में ,
शाम सिंदूरी हो आई है|

Tuesday, February 08, 2011

तुझको सबकुछ ख़त में लिखना

तुझको सबकुछ ख़त में लिखना
जीस्त जैसे तेरे नाम हो लिखना

आँख नहीं हटती है तुझसे
चाँद समझकर तुझको तकना

हर एक गली जैसे तेरा घर हो
हर इक मोड़ पे ऐसे रुकना

आकर कहीं फिर जा न सको तुम
कभी तो ऐसे खुल के मिलना

तेरी याद के मौसम में फिर
ज़ख्मों का फूलों सा खिलना

अपने हांथों की रेखा में
मेरा भी कभी नाम तो लिखना

Thursday, February 03, 2011

नज्म

तेरी नज़रों के हिसार में
अब हर वक्त
कैद रहती हूँ मैं.
चाहूँ भीं तो बच नहीं सकती
कुछ ऐसे खुद को खो बैठी हूँ मैं.
तेरी रफाकत के इस आलम में
दर्द ही हासिल है बस,
तू नहीं तेरी प्यास से
दिल को लगा बैठी हूँ मैं.