Monday, November 21, 2016

सुन्दरता की परिभाषा

सुन्दरता की परिभाषा 




“वास्तविक सुन्दरता क्या होती है?” कल कुछ ऐसा हुआ कि मन  इस प्रश्न पर विचार करने पर मजबूर हो गया है| कल हैदराबाद से वापस आते हुए एयर पोर्ट पर बैठ कर फ्लाईट का इंतज़ार कर रहे थे, फ्लाईट डिले थी और एयर पोर्ट रेलवे स्टेशन की तरह खचा-खच भरा था| हमारे पड़ोस में ही एक दम्पति बैठे थे, उम्र कुछ ५५-६० के करीब रही होगी| दोनों पति-पत्नी आराम से हिंदी में जोर-जोर से बात कर रहे थे| उन्हें हमारे परिवार की बातचीत से लगा होगा कि हम हिंदी नहीं समझते होंगे| इसलिए शायद वो इतनी जोर से बात कर रहे थे| तो उनकी बात-चीत कुछ इस प्रकार थी:
“लल्ला बाबू की जे कुछ समझ में न आई| शादी कराने की इत्ती भी का जल्दी मची थी कि ऐसी लड़की से अपने छोरा को ब्याह दये|”
“हां लड़की के नाक नक्श ठीक नहीं लगे| बस गोरी होने से ही क्या होता है|”
“अपना परथम तो देखने में कित्ता नीका लगे है, रंग बस थोडा दबे है, पर लड़कों का रंग थोड़ी देखा जाबे है| इंजिनियर है और का चाही|”
“हाँ लड़की भी वैसे सुना है इंजीयरिंग के बाद MBA करी है, नौकरी करती है| पर शकल भी कोई चीज़ होती है| न भई, लड़की सुन्दर नहीं देख पाए लल्ला बाबू|”
“जेई तो हम भी कह रहीं हैं, कोई जोड़ नहीं बैठा दोनों का| चाहे खर्चे कित्ता भी किये रहे हों समधियाने वाले पर लड़की का रूप भी तो देखे चाही|”
“चलो हमें क्या करना है| वो जाने और उनका काम जाने| हमें तो बस समझ न आई लल्ला बाबू की|”
“और क्या हमें क्या लेना देना| चलो छोड़ो, कौन सा हमारी बहु है|”
ये बात-चीत हमने संक्षेप में लिखी है| करीब आधे घंटे वो लोग इसी विषय पर बतियाते रहे और हम उनकी बातें सुनकर मन ही मन कुढ़ते रहे| लड़की लडके से ज्यादा पढ़ी-लिखी है, नौकरी करती है, उसके मां-बाप ने खूब पैसा भी खर्च किया और तो और गोरी भी है, पर सुन्दर नहीं है| क्या है इसका मतलब?
#कैसेकैसेलोग #KaiseKaiseLog


Saturday, September 24, 2016

कार की ज़रूरत

ज़िन्दगी आजकल ग्यारह नंबर की गाड़ी पर आ गयी है। कार बाढ़ की भेंट चढ़ चुकी है... इससे पहले कभी सोंचा नहीं था कि कार इतनी ज़रूरत की चीज़ है.... सालों पहले हमारे छोटे से शहर में तो कार विलासिता की चीज़ हुआ करती थी..... पता ही नहीं चला कब ये ज़रूरत की चीज़ बन गयी....स्कूटर चलाना आता तो है पर हम ट्रैफिक में कभी भी इसे नहीं चला पाते....कार ही अपनी साथी थी....और अब घर से निकलने से पहले दस बार सोंचते हैं....ज्यादातर चीजें Amazon और Big Basket से आ रही हैं....एक posotive thought बस यही है कि शायद चल-चल कर थोड़ा वजन ही कम हो जाय :-)

Saturday, December 19, 2015

वापस चेन्नई

आज वापस चेन्नई आ गये।

शहर चल तो रहा है पर थोड़ा सुस्त सा.....
चेहरे भी कुछ उदास से हैं और कुछ नाराज़ से.....                    
शिकायत कुछ 'उस' से है कुछ अपने आप से....
सिमट गया था जब शहर का दायरा तो दिल और बड़े हो गये थे.... एक पन्ना और पलट गया बस वक्त की किताब का।

Tuesday, December 01, 2015

दिसंबर

वक़्त की अंगीठी में सुलग कर, चुक गया ये साल भी 

लो फिर से आया है दिसंबर ज्यों अंत है शुरूवात भी. 

Saturday, November 21, 2015

बारिश के बाद..........

आज करीब दो हफ़्तों के बाद खिली निखरी धूप निकली है। इतनी तेज कि आँखों को चुभ रही है। नीले आसमान में सफेद बादलों के टुकड़े टंगे हुए हैं जैसे कि किसी ने बारिश के बाद धूप देखकर ढेर सारे कपडे सुखाने को डाल दिये हों।
लोग अपने घरों को वापस लौट रहे हैं। river view enclave में जहां दो दिन पहले नाव चल रही थी, आज लोग पैदल चल कर माहौल का जायज़ा ले रहे हैं। दीवारों पर पानी उतरने के बाद की चित्रकारी देख रहे हैं। घरों के सामने पुराने बिस्तर, तकिये, कपडे और भी न जाने क्या क्या कूड़े के ढेर में पड़ा है, पानी ने किसी को नहीं को बक्शा है। अडयार नदी में पानी कुछ नीचे उतर गया है पर नदी अभी भी पूरे वेग से बह रही है। हम सब को अहसास कराती हुयी कि प्रक्रति के आगे मनुष्य की ताकत कुछ भी नहीँ है।