तेरे आने की आहट से
फिजायें रंग लायीं हैं|
खिले हैं फूल गुलशन में,
बहारें मुस्कुराई हैं|
शरारत की है मौसम ने
फलक से घूँघट हटाया है
चमक उट्ठी है हर सू यूँ
सुबह ओस में नहाई है|
रूह ने किये सिंगार सोलह
बदन कोरा था पर अब तक
तेरी बाहों के घेरे में ,
शाम सिंदूरी हो आई है|
6 comments:
बहुत खूब ....! शुभकामनायें आपको !
dilchasp....
सारिका सक्सेना जी सुन्दर प्यारे कोमल भाव श्रृंगार रस छलकता हुआ ...प्यारी रचना बधाई हो
शरारत की है मौसम ने
फलक से घूँघट हटाया है
चमक उट्ठी है हर सू यूँ
सुबह ओस में नहाई है|
शुक्ल भ्रमर ५
सारिका जी,
आरज़ू चाँद सी निखर जाए,
जिंदगी रौशनी से भर जाए,
बारिशें हों वहाँ पे खुशियों की,
जिस तरफ आपकी नज़र जाए।
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!
------
चित्रावलियाँ।
कसौटी पर शिखा वार्ष्णेय..
बढ़िया प्रस्तुति शुभकामनायें आपको !
आप मेरे ब्लॉग पे आये आपका में अभिनानद करता हु
दीप उत्सव स्नेह से भर दीजिये
रौशनी सब के लिये कर दीजिये।
भाव बाकी रह न पाये बैर का
भेंट में वो प्रेम आखर दीजिये।
दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाओं सहित
दिनेश पारीक
आप सभी का हिन्दी साहित्य संकलन की ओर से स्वागत है ।
आप अपनी या किसी अन्य की कवितायें यहां निःशुल्क प्रकशित कर सकतें है । कॄपया वेबसाईट http://www.hindisahitya.org पर क्लिक करे और विस्तृत जानकारी प्राप्त करे ।
हिन्दी सेवा में समर्पित
http://www.hindisahitya.org
Post a Comment