अनकही बातें

बातें जो दिल से निकलीं ...पर ज़ुबां तक न पहुंची ...बस बीच में ही कहीं कलम से होती हुयी पन्नों पर अटक गयीं... यही कुछ है इन अनकही बातों में...

Tuesday, November 7

हमारी नई कृति और एक लम्बी अनुपस्थिति की वजह


वरलक्ष्मी [वरम] जन्म : १२ अक्टूबर २००६

"भर गई मेरे हांथों के प्याले में
एक नन्हीं सी मुस्कान
उठे थे हांथ जो दुआ के लिये
वो पा गये वरदान।"




2 Comments:

  • At Thursday, November 09, 2006 4:18:00 AM, Blogger Vijay Wadnere said…

    सारिका जी,

    लक्ष्मी के आगमन की बहुत बहुत बधाईयाँ.
    नाम भी बिल्कुल उपर्युक्त है - वरलक्ष्मी...!!

    वरम को हमारा -स्नेह!

    २री वाली तस्वीर में तो बिल्कुल कुऽचीऽ कुऽचीऽ लग रही है. :)

     
  • At Friday, August 31, 2007 3:48:00 AM, Blogger Nishikant Tiwari said…

    आ गया पटाखा हिन्दी का
    अब देख धमाका हिन्दी का
    दुनिया में कहीं भी रहनेवाला
    खुद को भारतीय कहने वाला
    ये हिन्दी है अपनी भाषा
    जान है अपनी ना कोई तमाशा
    जाओ जहाँ भी साथ ले जाओ
    है यही गुजारिश है यही आशा ।
    NishikantWorld

     

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