बातें जो दिल से निकलीं ...पर ज़ुबां तक न पहुंची ...बस बीच में ही कहीं कलम से होती हुयी पन्नों पर अटक गयीं... यही कुछ है इन अनकही बातों में...
posted by sarika saxena @ 2:22:00 AM
At Thursday, November 09, 2006 4:18:00 AM, Vijay Wadnere said…
सारिका जी,लक्ष्मी के आगमन की बहुत बहुत बधाईयाँ.नाम भी बिल्कुल उपर्युक्त है - वरलक्ष्मी...!!वरम को हमारा -स्नेह!२री वाली तस्वीर में तो बिल्कुल कुऽचीऽ कुऽचीऽ लग रही है. :)
At Friday, August 31, 2007 3:48:00 AM, Nishikant Tiwari said…
आ गया पटाखा हिन्दी काअब देख धमाका हिन्दी कादुनिया में कहीं भी रहनेवालाखुद को भारतीय कहने वालाये हिन्दी है अपनी भाषाजान है अपनी ना कोई तमाशाजाओ जहाँ भी साथ ले जाओहै यही गुजारिश है यही आशा ।NishikantWorld
Post a Comment
<< Home
View my complete profile
2 Comments:
At Thursday, November 09, 2006 4:18:00 AM,
Vijay Wadnere said…
सारिका जी,
लक्ष्मी के आगमन की बहुत बहुत बधाईयाँ.
नाम भी बिल्कुल उपर्युक्त है - वरलक्ष्मी...!!
वरम को हमारा -स्नेह!
२री वाली तस्वीर में तो बिल्कुल कुऽचीऽ कुऽचीऽ लग रही है. :)
At Friday, August 31, 2007 3:48:00 AM,
Nishikant Tiwari said…
आ गया पटाखा हिन्दी का
अब देख धमाका हिन्दी का
दुनिया में कहीं भी रहनेवाला
खुद को भारतीय कहने वाला
ये हिन्दी है अपनी भाषा
जान है अपनी ना कोई तमाशा
जाओ जहाँ भी साथ ले जाओ
है यही गुजारिश है यही आशा ।
NishikantWorld
Post a Comment
<< Home