कुछ हायकू मेरे भी
आजकल हायकू का मौसम सा आया हुआ है। सभी हायकू में अपने आपको अभिव्यक्त कर रहे हैं।
हमारा भी यह पहला प्रयास है हायकू लेखन में;
हुई बावरी
जब तुम मिले तो
खिला है मन
कच्चे धागे से
प्रीत के बन्धन ये
कितने पक्के
छिपे हो कहां
ढूंढू तुम्हें हर सू
अंखिया मीचे
देखूं अब क्या
बस गई मन में
तस्वीर तेरी
तेरी लगन
राधा सी प्रीत मेरी
कान्हा तुम हो
दहके गाल
रंग हुआ चम्पई
एक नज़र
तुम आ जाओ
लगता नहीं दिल
कैसे कहें ये
कहां मिलेगा
धरती अम्बर सा
साथ हमारा
तुमने छुआ
अंखिया झुक गई
छुई मुई सी
मन बसंती
गाने लगा मल्हार
बादल छाये
रतियां सूनी
तुम गये जबसे
दिन बिराना
हमारा भी यह पहला प्रयास है हायकू लेखन में;
हुई बावरी
जब तुम मिले तो
खिला है मन
कच्चे धागे से
प्रीत के बन्धन ये
कितने पक्के
छिपे हो कहां
ढूंढू तुम्हें हर सू
अंखिया मीचे
देखूं अब क्या
बस गई मन में
तस्वीर तेरी
तेरी लगन
राधा सी प्रीत मेरी
कान्हा तुम हो
दहके गाल
रंग हुआ चम्पई
एक नज़र
तुम आ जाओ
लगता नहीं दिल
कैसे कहें ये
कहां मिलेगा
धरती अम्बर सा
साथ हमारा
तुमने छुआ
अंखिया झुक गई
छुई मुई सी
मन बसंती
गाने लगा मल्हार
बादल छाये
रतियां सूनी
तुम गये जबसे
दिन बिराना





