मन तितली
तितली बन मन पंख पसारे।
बिखरे रंग धनक के सारे।
शोख हवा से लेकर खुशबू;
लिख दी पाती नाम तुम्हारे।
हुई आज मैं अपने पिय की;
टंक गये आंचल चांद-सितारे।
बाबुल अंगना छूटा अब तो;
चली आज मैं पिया के द्वारे।
प्यार की पहली बारिश में ही;
डूब गया मन संग तुम्हारे।
भर नज़रों से तुमने देखा,
झुक गईं अंखियाँ लाज के मारे।
अम्बर से कुछ स्याही लेकर;
लिक्खा खुद को नाम तुम्हारे।
तुमसे मिलना बातें करना;
पल में बीते लम्हे सारे।
संग तुम्हारे निकले घर से;
बढ के कोई नज़र उतारे।
बिखरे रंग धनक के सारे।
शोख हवा से लेकर खुशबू;
लिख दी पाती नाम तुम्हारे।
हुई आज मैं अपने पिय की;
टंक गये आंचल चांद-सितारे।
बाबुल अंगना छूटा अब तो;
चली आज मैं पिया के द्वारे।
प्यार की पहली बारिश में ही;
डूब गया मन संग तुम्हारे।
भर नज़रों से तुमने देखा,
झुक गईं अंखियाँ लाज के मारे।
अम्बर से कुछ स्याही लेकर;
लिक्खा खुद को नाम तुम्हारे।
तुमसे मिलना बातें करना;
पल में बीते लम्हे सारे।
संग तुम्हारे निकले घर से;
बढ के कोई नज़र उतारे।




