बातें जो दिल से निकलीं ...पर ज़ुबां तक न पहुंची ...बस बीच में ही कहीं कलम से होती हुयी पन्नों पर अटक गयीं... यही कुछ है इन अनकही बातों में...
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Wednesday, March 22, 2017
नन्ही लड़की
मेरे इस
संजीदा सी औरत के
किरदार के पीछे
मेरे अंदर
एक नन्ही लड़की
रहा करती है,
जो चाहती है
तितलियों के पीछे
नंगे पाँव भागना;
समुन्दर किनारे
गीली रेत से
घरौंदे बनाना;
मुझे मालूम है
कि वो नन्हीं लड़की
सिर्फ़ इसीलिए
अभी भी ज़िंदा है
क्यूँकि वो बचपन से ही
क़ैद थी
पाबंदियों के घेरे में
अगर वो बचपन में ही
तितलियों के पीछे भागी होती
या रेत से खेली होती
तो आज यूँ
बच्चों के खेल
देख के ललकती नहीं ....
पर कोई गिला नहीं
फिर भी ज़िंदगी से
आज मेरे अंदर की नन्ही लड़की
की दो हम उम्र सहेलियाँ हैं
हाँ, मैं माँ भी हूँ
और दोस्त भी अपनी बेटियों की...
उन्हें पूरी इजाज़त है
अपना बचपन बेलौस जीने की,
और मेरे अंदर की
नन्ही लड़की को इजाज़त है
फिर से बचपन को जी लेने की
Sunday, March 12, 2017
Saturday, February 18, 2017
Tuesday, January 31, 2017
Monday, January 23, 2017
Thursday, February 03, 2011
Saturday, December 25, 2010
ख़्वाब
कच्ची मिटटी से थे
जो ख़्वाब कल बनाए थे,
चलो आज पका लें उन्हें
अपने हांथो की
गर्मी से, अपनी साँसों की तपिश से
की ख़्वाब हैं ये तो
इन्हें चाहिये बस
हांथों की नरमी और साँसों की नर्मी
नहीं मिला जो इन्हें
तेरी बाहों का सहारा
तो बह जायेंगे आंसुओं के
समंदर में.......
जो ख़्वाब कल बनाए थे,
चलो आज पका लें उन्हें
अपने हांथो की
गर्मी से, अपनी साँसों की तपिश से
की ख़्वाब हैं ये तो
इन्हें चाहिये बस
हांथों की नरमी और साँसों की नर्मी
नहीं मिला जो इन्हें
तेरी बाहों का सहारा
तो बह जायेंगे आंसुओं के
समंदर में.......
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